मरीज़ ने की मेरी चुदाई

मैं अलका आप सभी का फ्री हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट नेट पर बहुत बहुत स्वागत कर रही हूँ. मैं आपको अपनी कहानी अपनी जुबानी सुना रही हूँ. ये सुनकर आपका दिल दहल जाएगा और आपकी आँखें खुल जाएँगी. मैं एक बहुत ही सताई हुई औरत हूँ. मैं अमेठी की रहने वाली हूँ. मेरे पति छोटेलाल बवासीर के डॉक्टर थे. वो बहुत ही सफल डॉक्टर थे. उनके हाथ में बहुत हुनर था. बवासीर, पाइल्स, फिसेर, फेचुला का वो बहुत सफल इलाज करते थे. मेरे पति घर ही अपना क्लिनिक चलाते थे. मेरे मोहल्ले के सभी लोग मुझको डॉकटराइन डॉकटराइन कहकर बुलाते थे. उन दिनों में मेरी मेरे मोहल्ले में तूती बोलती थी. (Hindi sex story, Desi kahani, Gandi kahani)

पुरे मोहल्ले में मेरा घर ही दो मंजिला था. जहाँ मेरे सभी पडोसी बहुत गरीब थे, वही हम बहुत अमीर थे. हम लोग बासमती चावल रोज खाते थे. अच्छे महंगे कपड़े पहनते थे. मेरे घर में महंगे महेंगे सोफे थे. मैं भी कभी कभी अपने पति छोटेलाल के साथ क्लिनिक में बैठती थी. मेरे पति का काम बहुत बढ़िया चल रहा था. रोजाना हम ८ से १० हजार कमा लेते थे. कुछ दिन बाद मेरे पति के क्लिनिक पर महबूब अली नामक एक मरीज आने लगा. वो मुस्लिम था. मेरे पति कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गए हुए थे, इसलिए मैं उसके बवासीर का इलाज करने लगी. महबूब अली एक बहूत ही दिलचस्प आदमी थी. वो शेरो शायरी करता था. जब भी वो मेरे पास इलाज के लिए आता था कोई ना कोई अपना लिखा शेर जरुर सुनाता था.

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धीरे धीरे मेरी उससे नजदीकियां बढने लगी. एक दिन जब वो आया तो मैं भी बड़े रोमांटिक मूड में थी. मैंने कुछ शेर लिखे और उसे सुना दिए. महबूब अली ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठो पर चुम्मी ले ली. ‘अलका जी!! आप बहुत खूबसूरत है!!’ महबूब बार बार कहता था. मुझे उससे प्यार हो गया था. मैंने उससे कह दिया. महबूब ने मुझे वहीँ क्लिनिक में पकड़ लिया और मेरे हाथ पकड़ के मेरे दोनों मस्त मस्त गुलाबी होठों पर उसने चुम्मा ले लिया. फिर मेरे होंठ वो पीने लगा. मैं उन दोनों बड़ी जवान थी. २५ साल की मस्त माल थी मैं. मैं इतनी गोरी और लाल रखी थी की लोग कहते थे मेरे ये गाल गाल नही बल्कि खर्बुज्जे है.

महबूब क्लिनिक में ही मेरे होठ पीने लगा. मैंने भी कोई ऐतराज नही किया. क्यूंकि मैं भी उससे पट गयी थी और उससे प्यार करने लगी थी. क्लिनिक में एक लम्बी मेज थी जहाँ मेरे पति मरीजों का इलाज करते थे. महबूब ने मुझको उसी ६ फुट लम्बी मेज पर लिटा दिया. मैंने उस दिन गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थी. मेरे डी साइज़ के बड़े बड़े मम्मे साड़ी के उपर से दिख रहें थे. महबूब ने मेरे मम्मों पर अपना हाथ रख दिया. मैं तिलमिला गयी. मैं जान गयी थी की वो मरीज महबूब मुझको चोदना चाहता है. मैं भली भांति जानती थी. महबूब मेरे मस्त मस्त मम्मो को दबाने लगा. मैंने कुछ नही कहा. कुछ देर तक वो मेरे होंठ पीता रहा. फिर उसने मेरे ब्लौस के बटन खोल दिए. मेरी ब्रा जो मैंने पहन रखी थी, उतार दी और मेरे मस्त मस्त डी साइज़ की छातियों को दबाने लगा. मुझे बहुत मजा आया. फिर महबूब मेरे दूध को पीने लगा. सच में मैं निहाल हो गयी.

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मेरे डॉक्टर पति से भी अच्छी तरह से वो मेरे दूध पी रहा था. मेरी छातियों को वो अपने हाथ से जोर जोर से दबा रहा था और सहला रहा था. मैं बहुत मजा मार रही थी. मैं अच्छी तरह से जानती थी की जो आदमी इतनी अच्छे तरह से मेरी छातियाँ पी सकता है, वो मुझे अच्छी तरह से चोद भी सकता है. महबूब ने बड़ी देर तक मेरे दोनों मस्त मस्त हेवी साइज़ के मम्मे पिए. फिर उसने मेरी साड़ी उपर उठा दी. उसने क्लिनिक का पर्दा खीच दिया जिससे हम दोनों आशिकों की रासलीला कोई ना देख सके. बाहर लाबी में १५ २० मरीज मेरा इन्तजार कर रहें थे. और मैं यहाँ अपने नए आशिक से चुदवाने जा रही थी. मैंने कोई फ़िक्र नहीं की. महबूब अली ने मेरी साड़ी उपर उठा दी. मैंने गुलाबी रंग की साड़ी के रंग से मैचिंग पैंटी पहन रखी थी. महबूब मेरी गदराई बड़ी सी उभरी चूत को देखकर ललचा गया. उसने तुरंत अपना हाथ मेरी बुर पर लगा दिया और पैंटी के उपर से मेरी बुर पर अपनी उँगलियाँ सहलाने लगा. मुझे इस शायर से प्यार हो गया था. हाँ, मैं इससे चुदवाना चाहती थी.

मैं दिल धक धक करने लगा. महबूब बड़ी देर तक अपनी उँगलियों से पैंटी के उपर से मेरी बुर सहलाता रहा. मेरी पैंटी बहुत कसी थी. मेरी चूत बड़ी मस्त थी. अगर कोई भी मर्द मुझे पैंटी में देख लेता तो कम से कम १ बार तो मुझको चोदना ही चाहता. महबूब का भी कुछ ऐसा ही हाल था. वो बार बार अपनी ऊँगली मेरी बुर पर गुलाबी पैंटी पर सहला रहा था. मैं उसकी चाल समझ रही थी. वो मुझे जादा से जादा तडपाना चाहता था. फिर महबूब से पैंटी के उपर से ही मेरी बुर के अंडर ऊँगली डाल दी और बड़ी गहरी गहरी रगड देने लगा. मैं तड़प उठी. मादरचोद महबूब बड़ा कमीना आदमी निकल गया ना तो वो मुझे चोद रहा था, और ना ही मेरी गांड मार रहा था. मैं गुस्सा हो गयी.

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अबे, माँ के लौड़े, सुहरा क्या रहा है?? चोदना है तो चोद, वरना अपनी माँ चुदा!! मैंने गुस्से में कह दिया.

महबूब जाग उठा. उसने तुरंत अपनी पैंट खोल के अपना बड़ा सा लौड़ा निकाला. मेरी गुलाबी पैंटी को उसने एक ओर खिसका दिया. मेरी चूत अब दिखने लगा. महबूब ने तुरंत अपना लौड़ा मेरी बुर पर रखा और जोर का धक्का दिया. उसका मोटा लौड़ा मेरे बोसडे में दाखिल हो गया. महबूब मुझको चोदने लगा. ऊउई माँ !! आआआ माँ माँ माँ !! की आवाज करते हुए मैं चिल्ला चिल्ला कर चुदवाने लगी. महबूब ने मेरी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ रखी थी, जिससे वो नीचे लटक कर गन्दी ना हो जाए. वो मुझे धचक धचक करके पेल रहा था. मैं पेलवा रही थी. उधर बाहर मेरे मरीज डॉकटराइन डॉकटराइन करके बुला रही थी. मैं खामोश थी क्यूंकि मैं अपने मरीज से चुदवा रही थी. मैं अपने प्रिय मरीज के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी. मैं जवाब भी नही डे सकती थी. महबूब मुझे फट फट करके चोद रहा था. उसके मोटे लौड़े को मैं अपनी योनी को साफ साफ महसूस कर सकती थी. उसका मोटा लौड़ा मेरी बुर को अच्छे से चोद रहा था. मैं उसकी ताकत और उसकी हनक को साफ साफ महसूस कर सकती थी.

मैं किसी मुर्गी की तरह अपने दोनों पैरों को फैलाये हुए थी. मेरा मरीज महबूब आज मुझको चोद चोदकर मेरी चुदास का इलाज कर रहा था. जहाँ मेरे पति का लौड़ा बड़ा पतला और छोटा सा था वहीँ महबूब का लौड़ा बड़ा मोटा था गधे के लौड़े जैसा सा था. वो मेरे भोसड़े को अपने लौड़े से फाड़ रहा था. अपने लौड़े से चोद चोदकर मेरी चुदास और वासना का इलाज कर रहा था. महबूब ने मुझे २ बार उसी भीड़ भडक्का वाली क्लिनिक में ठोका और मेरी चूत में ही माल गिरा दिया. मुझे चोदकर जब वो बाहर निकला वो बाकी मरीज उसे बड़ी गौर से देखने लगे. फिर मैं उस पर्दे से बाहर निकली. कुछ मरीज शक करने लगे की मैंने उस मरीज से क्लिनिक में ही चुदवा लिया है. ३ दिन बाद मेरे पति लौट आये. अब मैं घर में ही थी, क्यूंकि अब पति आ गए थे. अब वो ही मरीजों का इलाज कर रहें थे. एक दिन मेरे पति ने कमरे में सगी cctv फुटेज चेक की थी तो उनकी आँखें ही फटी रह गयी. महबूब अली के साथ मेरी चुदाई पूरी की पूरी रिकॉर्ड हो गयी थी उस कैमरे में.

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ना तो महबूब को इसकी फ़िकर रही और ना मुझे इसका ख्याल रहा. मेरे पति ने उस दिन मुझे चप्पल झाड़ू से खूब मारा.

बता छिनाल , कब तेरा उस मरीज से टांका भिड़ा?? कितने बार उससे अपना भोसड़ा फड़वा चुकी है??? बता छिनाल, मुझे अपनी सब करतूत बता?? मेरे पति छोटेलाल ने मेरा झोटा [बाल] पकड़ के पूछा

मैंने सिर्फ एक बार उससे अपनी चूत फड़वाई है !! मैंने पति को बताया

क्या तू उससे प्यार करती है?? उन्होंने पूछा

हाँ मैंने जवाब दिया.

मेरे पति ने मुझे १५० २०० चपलें मेरे मुँह पर, पीठ गले पर मारी. मेरा मुँह सूज गया. फिर मेरे पति ने मुझ पर लात, घूसों की बौछार कर दी. मुझको उसने किसी पालतू कुतिया की तरह पीटा. १० दिन तक मेरे पति ने मुझसे बात नही की. मैंने कसम खाकर कहा की अब मैं महबूब अली ने नही चुदवाउंगी. पर एक दिन महबूब मेरी क्लिनिक पर आ गया. किस्मत से आज भी मेरे पति किसी काम से बाहर गए हुए थे. महबूब रो रोकर मुझसे अपनी मुहब्बत का इजहार करने लगा. मैं कमजोर पड़ गयी. हम दोनों गले लग गए, हीर रांझा की तरह एक दूजे के सीने से चिपक गए. महबूब इस बार भी जब मेरे होठ पीने लगा तो मैं कुछ नही कर सकी. धीरे धीरे उसके हाथ मेरे मम्मों पर जाने लगे. एक बार फिर से वो मुझे मरीज देखने वाली मेज पर ले गया और पर्दा खींचकर उसने मुझे खूब पेला. मुझे भी मौज आ रही थी इसलिए मैंने भी महबूब से खूब पेलवाया. इस बार भी हम दोनों लै़ला मजनू भूल गए की कैमरे में हमारी चुदाई रिकॉर्ड हो रही है.

मेरे पति ने शाम को जब क्लिनिक बंद की तो फिर से हमारी चुदाई की रिकॉर्डिंग उनको मिल गयी. मेरे पति ने मुझको धक्के मारकर घर से निकाल दिया.

जा छिनाल, अगर तुझे अब उस मरीज से ही चुदवाना है तो उसी के पास जाकर अपना मुँह काला कर !! मेरा पति बोला.

मैं महबूब के घर गयी तो देखा की बहुत छोटा सा घर था. उसके घर में उसकी बीबी, और ८ बच्चे थे. घर कम चिड़ियाघर जादा लगता था. मुझे देखकर महबूब अली की बीबी उससे मेरे बारे में पूछताछ करने लगी. जब उसको पता चला की महबूब का मुझसे नायाजय चुदाई का रिश्ता है तो उसने महबूब से बहुत झगडा किया. फिर भी महबूब ने मुझे रहने के लिए एक कमरा दे दिया. वो रात मेरी उसके घर में पहली रात थी. मेहबूब के बच्चे समझ नही पा रहें थे की मुझे क्या कहे. अम्मी कहे या खाला कहे. जब उसकी बीबी को पता चला की मैं हिंदू हूँ तो उसने पुरे घर में कोहराम मचा दिया. रात को १२ बजे महबूब चुपके से मेरे पास आ गया.

अलका! दरवाजा खोल! मैं महबूब!! वो बोला

अपने जानम की आवाज सुनकर मैं उसे एक बार में पहचान गयी. मैं दरवाजा खोल दिया. महबूब मेरे सीने से लग गया. अपनी बीबी के खौफ से उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. घंटों हम दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपटे रहे. फिर महबूब ने मुझसे कपड़े उतारने को कहा. मैं सारे कपड़े निकाल दिए. मेरा यार महबूब मेरे दूध पीने और दाबने लगा. मुझे बड़ा मजा आया. अपने पति से नाइंसाफी करने का मुझे जरा भी पछतावा नही था. महबूब मस्ती से मेरे दूध पी रहा था. मेरी छातियों को जोर जोर से दबोट रहा था, मेरे मम्मो को दाब रहा था. फिर महबूब ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. अपना मोटा सा लौड़ा उसने मेरे दोनों मम्मों के बीच में डाल दिया. और मेरे बेहद नरम नरम मम्मो को वो चोदने लगा. मुझे तो बड़ा मजा आया दोस्तों. बड़ी देर तक वो मेरी छातियों को चोदता रहा. फिर उसने मेरी बुर फाड़ के रख दी. ये कहानी आप फ्री हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट नेट पर पढ़ रहें थे.



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