दीदी के कारनामे – 2

मैं तपाक से बोला- अरे दीदी, आप जाओगी तो घर पर मैं अकेले बोर हो जाऊँगा.. मैं भी चलूँगा साथ !

दीदी और उस आदमी की शक्ल देखने लायक थी.. ऐसा लग रहा था जैसे मेरे बात सुनते ही दोनों की छाती पर साँप रेंगने लग गये..

तभी भाई साहब बोले- आप दोनों क्यूँ परेशान होते हो.. किराया ही तो है.. कभी भी ले लूँगा आकर मैं ! क्यूँ समीरा..!

दीदी बोली- हाँ भाई साहब.. आपका ही घर है. कभी भी आ जाओ !

मुझे थोड़ी राहत की साँस आई.. चलो एक काम तो हुआ.. अब आगे का काम बाकी था

मैंने रात भर पूरे घर का जायज़ा लिया लेकिन मुझे ऐसे कोई जगह नहीं मिली जहाँ से मैं उन दोनों को देख सकूँ। यह सब मैंने कहानियों में पढ़ा था.. दरवाज़ों में छेद होता है.. खिड़की बंद नहीं होती ! लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं था..

मैं निराश हुआ लेकिन तभी एक आइडिया आया.. मैंने अपना आई-पॉड निकाला.. और उसको दीदी के कमरे में फिट करने का प्लान बनाया.. रात भर मैं उसकी टेस्टिंग करता रहा.. और यह पता लगा की यह लगातार 90 मिनट तक रेकॉर्डिंग कर सकता है.. फिर बैटरी भी ख़त्म और मेमरी भी !

अगली सुबह जब मैं उठा तो दीदी रसोई में काम कर रही थी नाइटी पहन कर.. कसम बनाने वाले की.. दिल कर रहा था कि वहीं रसोई में नाइटी उठाकर दीदी को चोद दूँ।

खैर मैंने अपनी योजना पर कम करना शुरू किया.. मैं बोला- दीदी, इसी शहर में मेरा एक दोस्त पढ़ता है.. कल मैं उससे मिलने जाऊँगा.. 2 घंटे में आ जाऊँगा.. यही रहता है 10 किलोमीटर दूर..

दीदी ने बोला- ठीक है लेकिन ध्यान से आना-जाना !

मैं बोला- ठीक है दीदी ! और आपको अगर जाना हो तो आप भी किराया दे आना उनके घर जाकर !

दीदी ने अचानक से मेरी तरफ घूर कर देखा… मैंने बड़ा मासूम सा चेहरा बनाया…

फिर वो भी बोली- वो भाई साहब खुद आ जाएँगे लेने जब लेना होगा उन्हें किराया !

मैंने मन में बोला- मेरी बहना, मैंने तो तेरे दिमाग़ में अपना प्लान डाल दिया.. अब तू खुद बुलाएगी अपने यार को कल चुदने के लिए…

अगली सुबह हुई और ठीक उस दिन की तरह दीदी आज बड़ी सज रही थी, मैंने पूछा तो बोली- पड़ोस में जाना है, कुछ काम है.. खैर जैसे ही मौका मिला मैंने आई-पोड चालू किया और तुरंत दीदी को बोल कर घर से निकल गया.. और घर से दूर मैं रोड के पास एक चाय वाले की दुकान पर बैठ गया.. 5-10 मिनट बीत गए, वो कार नहीं दिखी आती हुई… मुझे अब अपना प्लान डूबता नज़र आ रहा था.. तभी वही कार वहा से निकली.. मेरी तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा..

अब किसी तरह मैंने 3 घंटे बाहर बिताए.. फिर घर चला गया.. घंटी बजाई तो दीदी ने दरवाजा खोला..  वो इस वक़्त नाइटी में थी.. मैंने दीदी से मज़े लेते हुए पूछा- अरे दीदी, सुबह साड़ी में थी.. अब नाइटी..? आप दिन में तो नाइटी नहीं पहनती?

दीदी का चहरा सफेद पड़ गया 2 सेकेंड के लिए.. और मैं मन ही मन खुश हो रहा था..  खैर मुझे अब वो वीडियो देखनी थी.. मैंने दीदी के कमरे से वो आइपोड उठाया और अपने कमरे में आकर देखने लगा..  आगे का किस्सा दीदी और मकान मलिक के बीच का..

वीडियो जब शुरु हुई तो उस वक़्त कमरे में कोई नहीं था.. करीब 15 मिनट बाद घंटी की आवाज़ हुई.. और फिर दीदी और उस आदमी की बातें सुनाई देने लगी।

दीदी- आ गये आप भाई साहब ! आइए, अंदर आइए ना.. आईई, ये कर कर रहे हो ! आहह ! कुछ तो शरम करो ! दरवाजा अभी खुला हुआ है.. ओइइ माआआआ ! दर्द होता है..

ये आवाज़ें सुनते ही मेरे लंड फड़फड़ाने लगा और ख्यालों में दीदी को उस जानवर के हाथों मसलते देख रहा था..

तभी उस मकान मालिक की आवाज़ आई..

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इतने दिन से तड़पा रखा है तूने डार्लिंग.. अब आई औययईई कर रही है…

दीदी- अम्म ! अर्रे, ममम !!!

ऐसा लगा कि दीदी कुछ बोलना चाह रही थी लेकिन उसने दीदी को बोलने नहीं दिया और दीदी के गद्देदार लाल लिपस्टिक वाले होंठ चूस रहा होगा..

दीदी के गूँ गूँ करने की आवाज़ आ रही थी और चूड़ियाँ भी बहुत जोरो से खनक रही थी.. और यहाँ मैं यह सुन कर मदहोश होता जा रहा था..

दीदी- आहह ! बहुत बदमाश हो गये आप भाई साहब… थोड़ा तो इंतज़ार करो ! चेंज तो करने दो…

मकान मालिक- आज तो ये कपड़े फट कर ही अलग होंगे जानेमन…

दीदी- अरे पागल हो गये हो क्या तुम.. उफफ्फ़ साड़ी छोड़ो मेरी.. नाईए… औहह..

दोनों के हंसने की आवाज़ आती.. और तभी दीदी भागती हुई कमरे में आती दिखी..

कसम बनाने वाले की.. बस पेटीकोट ब्लाउज में थी मेरी बहन.. खुले हुए बाल.. होंठों के आसपास लिपस्टिक फैली हुई नज़र आ रही थी.. और तभी पीछे से मकान मलिक भी भागता हुआ अंदर आया.. और अंदर आते ही दीदी को दबोच लिया और दीदी को दीवार के सहारे लगा कर मसलने लगा..

दीदी बहुत कामुक आवाज़ें निकाल रही थी.. आआअहह ! भागी नहीं जा रही मैं.. आराम से करो मेरी जान.. उफफ्फ़… म्‍म्म्मम..
दीदी अपने होंठ अपने दातों से काट रही थी.. और उसके सिर पर हाथ फिरा रही थी..

तभी उसने दीदी को बेड पर झुका दिया और पीछे से दीदी की नंगी पीठ को चाटने लगा.. और अचानक से दीदी के ब्लाउज को ज़ोर से खींचा.. ब्लाउज के हुक टूट गए ! यूँ उसने दीदी की ब्रा भी उतार कर उन्हें नंगा कर दिया..

कुछ ज़्यादा ही गर्म आदमी था वो..

दीदी की कराहने की आवाज़ मेरा लंड झड़ने के लिए काफ़ी थी…

अहह ! और मैं एक बार पैंट में ही झड़ गया..

इधर उसने दीदी का पेटिकोट ऊपर करके अपने मुँह को दीदी की गाण्ड में घुसा दिया था और पीछे से उनकी गाण्ड का छेद और चूत चाट रहा था… और मेरी बहन एक गरम कुतिया की तरह रंभा रही थी.. आ आआ आआआ आअहह… ऑश माआ आआआअ ..

अपने होंठ दांतों से काट रही थी.. तभी दीदी का शरीर अकड़ा और फिर वो ढीली पड़ गई.. और खुद ही बेड पर लेट गई..

उस आदमी ने खड़े होकर अपने कपड़े उतार दिए.. 6-7 इंच का लंड लगा उसका ! ज़्यादा मोटा भी नहीं.. लेकिन एकदम डण्डे की तरह खड़ा था… वो दीदी की टाँगों के बीच आया और अपना लंड दीदी की चूत पर लगा कर अंदर घुसा दिया।

दोनों के मुँह से कामुक कराह निकली- आआहह !

उसके बाद उसने जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया, थोड़ी देर में दीदी फिर से गरम होकर चीखने लगी- अहह ! आय माआ आ.. ज़ोर से और ज़ोर से… ओह… बहुत अच्छा लग रहा है… अम्‍म्म्म..

कुछ देर तक ज़ोरदार चुदाई करने के बाद वो आदमी जोर से गुर्राया- आआहह… झड़ रहा हूँ…

और दीदी की कोख में अपना सारा बीज डाल दिया।

कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने बाद दीदी उसे फिर से चूमने लगी और बड़ी इठला कर बोली- देखो ना.. तुमने मेरा यह ब्लाउज भी फाड़ दिया.. अब मैं नई साड़ी कहाँ से लूँगी..

आदमी बोला- क्यूँ परेशान होती हो मेरी जान.. कैसी साड़ी चाहिए, बोलो.. चलो तुम्हें दो साड़ियाँ लाकर दूँगा..

इतना सुनते ही मेरी दीदी खुश हो जाती है और एक हाथ से उसका लंड सहलाने लगती है.. उसकी आँखें बंद होने लगती हैं..

दीदी फिर बड़े कामुक अंदाज में इठला कर बोली- आप मुझे प्यार नहीं करते, बस जब ठरक होती है तो चोदने आ जाते हो…

वो बोला- नहीं मेरी जान, तुम मेरी जान हो, ऐसा मत सोचो..

और वो दीदी को होंठों को चूमने के लिए आगे हुआ.. दीदी ने मुँह फेर लिया..

दीदी- अगर प्यार करते तो यह 500 रुपये की साड़ी देकर रंडी की तरह मुझे ना चोदते.. प्यार तो अनमोल होता है और तुमने मुझे आज तक कुछ नहीं दिया.. कैसा प्यार करते हो..

वो- क्या चाहिए तुम्हें? बोलो..

दीदी- कुछ नहीं चाहिए !
और दीदी मुँह लटका कर उदास बैठ गई..

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वो पास आकर दीदी नंगी चूचियाँ दबाते हुए बोला- बोलो ना जानू ! क्या दिक्कत है.. मैं हूँ ना.. बताओगी नहीं तो कैसे करूँगा मैं कुछ..

दीदी- कुछ नहीं.. बस इनकी सैलरी ही इतनी कम है कि ! मेरे सजने संवरने का सामान तक नहीं खरीद पाती..

और दीदी झूठ मूठ का रोने लगी..

यह देखते ही उस आदमी ने अपने पर्स में से एक एटीएम कार्ड निकाल कर दीदी को दे दिया और बोला- लो, आज से यह एटीएम तुम्हारा! जो सामान खरीदना हो, खरीद लेना.. लेकिन मेरी जान ! अपने आशिक के सामने रोकर उसे दुखी ना करना !

एटीएम देखते ही दीदी की आँखें चमक गई.. और वो दोनों फिर एक जोरदार चुदाई में लग गये..



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