खड़ा लंड को भाभी के चूत पे रगड़ा

हैल्लो दोस्तों, अब में आप सभी को अपनी एक सच्ची घटना बताने वाला हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि इसको पढ़कर आप लोगों को बहुत मज़ा आ जाएगा। दोस्तों जैसा कि आप लोगों को पता है कि मेरा लंड 7 इंच का है, जिसे देखकर कोई भी भाभी उसकी तरफ आकर्षित हो जाती है और अब में अपनी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों में अपने परिवार के साथ मुंबई में रहता था और में जिस फ्लेट में रहता था, जिसके पास वाले फ्लेट में एक पंजाबी परिवार भी रहता था, उसमें अंकल, आंटी, उसकी बेटी जिसकी उम्र करीब 20 साल थी और उसका बेटा और उसकी बीवी और एक साल का बच्चा भी था। हम दोनों का परिवार बहुत ही कम समय में एक दूसरे से बहुत घुल मिल गए थे, हम कोई भी त्यौहार हो एक साथ ही मनाते थे, मेरी भी उन सबके साथ बहुत अच्छी बनती थी और उसकी बेटी जो 20 साल की थी, वो मेरे साथ ही पढ़ती थी तो इसलिए हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। उसके बड़े भाई को में भैया और उसकी पत्नी को में भाभी कहकर बुलाता था।

अब में आप सभी लोगों को उस भाभी के बारे में भी थोड़ा विस्तार से बता देता हूँ। वो एक सीधी साथ लड़की थी और पंजाबी परिवार से थी, लेकिन एकदम टाईट सेक्सी माल और उसका नाम किंजल भाभी था। उसके फिगर का आकार 34-26-34 था और वो दिखने में किसी ब्लूफिल्म की हिरोइन से कम नहीं लग रही थी..

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वो हमेशा साड़ी ही पहनती थी और एक अच्छी बहू की तरह रहती थी, लेकिन उसका साड़ी पहनने का तरीका बहुत ही अच्छा था, वो एकदम टाईट साड़ी पहनती और साथ में बिना बाहं और पीछे से ज्यादातर खुला हुआ ब्लाउज पहनती थी, जिसकी वजह से उसका पीछे से पूरा नंगा बदन होता था और उसका हमेशा बीच में से पेट खुला हुआ होता था, जिसकी वजह से उसे आगे से देखो तो उसकी नाभि बहुत मस्त गहरी दिखती थी और जब उसे एक साईड से देखो तो उसकी कमर और नाभि उससे भी मस्त दिखती और उसके बूब्स साफ साफ दिखाई देते थे, क्योंकि उसके बूब्स बहुत बड़े थे। दोस्तों पहले मेरे मन में भाभी के लिए ऐसा कुछ नहीं था, हम सब खुशी खुशी हर त्यौहार मनाते थे और में भी उनसे हंसी मजाक किया करता था, वो भी मेरी हर बात का हंसकर जवाब दिया करती थी और मुझे उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा बहुत अच्छा लगता था।

दोस्तों अब में धीरे धीरे  सेक्सी कहानियाँ पढ़ने लगा था और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता। मैंने बहुत बार कई लोगों के सेक्स अनुभव के बारे में पढ़ा और धीरे धीरे मेरा उनको देखने का नजरिया बिल्कुल ही बदल गया, वैसे वो खुद भी मुझसे बहुत खुलकर बातें करने लगी थी और में उनसे कभी कभी दो मतलब वाली बातें करने लगा था, जिनको वो समझ जाती थी और कभी कभी मेरी तरफ मुस्कुरा देती थी और उस वजह से मेरी हिम्मत थोड़ी सी बढ़ने लगी थी।

एक दिन क्या हुआ कि? उनके घर पर उस दिन कोई भी नहीं था, सभी लोग बाहर गए हुए थे और उनके लिए खाना हमारे घर से बना था, क्योंकि उनकी तबियत थोड़ी सी खराब थी, वो सब मुझे बाद में पता चला। उस दिन में उन्हें खाना देने उनके घर पर चला गया और जब में उनके घर पर पहुंचा तो मैंने देखा कि दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था, इसलिए में बिना दरवाजे को बजाए सीधा ही अंदर चला गया, लेकिन अंदर जाने के बाद भी मुझे किंजल भाभी कहीं नहीं दिखी, इसलिए में उनके कमरे की तरफ चला गया। उनके कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था।

दोस्तों में अंदर घुसने ही वाला था कि तभी मेरी नज़र अंदर की तरफ पड़ी और मैंने देखा कि उस समय भाभी सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में बैठी हुई अपने बाल बना रही थी, जिसको देखकर में पहले तो बहुत चकित हुआ, लेकिन कुछ देर बाद में उन्हें घूर घूरकर देखने लगा, मेरी आखें वो सब देखकर फटी की फटी रह गई…

वाह दोस्तों वो क्या मस्त लग रही थी, उनका गोरा बदन, बड़े आकार के बूब्स को देखकर मेरा लंड तो तनकर खड़ा हो गया, क्योंकि मैंने आज पहली बार उन्हें इस तरह कम कपड़ो में देखा था और में वहीं पर खड़ा होकर अपना लंड जीन्स के अंदर ही हिलाने लगा। फिर कुछ देर दिखने के बाद वो अब खड़ी हो गई और साड़ी पहनने लगी और तैयार हो गई। उसने उस समय पीले कलर की साड़ी और काले कलर का ब्लाउज पहना हुआ था, उसमें वो और भी कातिल लग रही थी।

फिर में जल्दी से मौका देखकर तुरंत बाहर चला गया और अब मैंने दरवाजे पर लगी घंटी बजाई। तभी कुछ देर बाद वो आई तो मैंने उनसे कहा कि यह आपका खाना तो उन्होंने मुझे अंदर आने को कहा और में अंदर चला गया। दोस्तों उसे शायद पता नहीं था कि दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था और में उन्हें उस हालत में देख चुका हूँ। फिर हमने थोड़ी देर इधर उधर की बातें की और फिर कुछ देर बाद में उठकर उनके बाथरूम में चला गया, जहाँ पर मैंने देखा कि वहां पर उसकी दूसरी ब्रा और पेंटी खूँटी पर लटकी हुई थी। मैंने उसे नीचे उतरकर सूँघकर वहीं पर उनके नाम की मुठ मार ली और बाहर आ गया।

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दोस्तों उस दिन मैंने पहली बार भाभी के नाम की मुठ मारी थी। मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आया और तब से मुझे उसको चोदने का विचार मेरे मन में आने लगा था और में विचार करने लगा कि अब कैसे इसको चोदा जाए? अब मुझे जब भी मौका मिलता तो में उसे लाईन मारता और उसके गोरे बदन को घूरता और बड़े बड़े बूब्स को लगातार देखता रहता था और अब में जितना हो सके उससे ज़्यादा बातें करता और जब भी वो अकेली होती तो में उनके घर पर चला जाता और हम बहुत हंस हंसकर बातें करते…

हम बहुत खुलकर भी बातें करने लगे थे, हमारे बीच हंसी मजाक अब कुछ ज्यादा ही बड गया था। फिर एक दिन वो भैया हमारे घर पर आए और उन्होंने मेरे घर पर मेरी मम्मी, पापा को कहा कि हम लोग गावं जा रहे और वो किंजल भाभी और उसकी बहन मीनल यहीं पर रुकेगी तो आप लोग थोड़ा उनका ध्यान रखना, क्योंकि वो दोनों घर पर बिल्कुल अकेली रहेगी।

फिर मेरी माँ ने उनसे कहा कि आप बिल्कुल भी चिंता मत करो, में उनकी पूरा पूरा ध्यान रखूंगी, आप लोग चले जाओ। दोस्तों अब मेरे मन में विचार आया कि यही बिल्कुल सही मौका है भाभी को पटाने का, लेकिन उस मीनल का कुछ करना पड़ेगा, क्योंकि वो भी घर पर रहेगी? दोस्तों में मन ही मन में सोचने लगा कि हमारा कॉलेज जाने का समय सुबह का था तो वो उस समय कॉलेज चली जाएगी और पूरे दिन भाभी घर पर बिल्कुल अकेली रहेगी और मुझे पहले से ही इस बात का भी पता था कि कल पूरे दिन मेरे घर वाले किसी शादी में जाने वाले है और वो शाम को वापस आएँगे, इसलिए मैंने बीमार होने का नाटक करने का विचार किया।

फिर अगले दिन सुबह 6 बजे किंजल भाभी के परिवार वाले गाँव चले गए और फिर मैंने बीमार होने का नाटक किया तो मुझसे मेरे घर वालों ने कहा कि तुम आज कॉलेज मत जाना और मैंने कहा कि ठीक है। फिर मीनल मुझे कॉलेज जाने के लिए बुलाने आई, क्योंकि हम दोनों साथ ही कॉलेज जाते थे तो मैंने उससे कहा कि आज में नहीं आ सकता, मेरी तबियत खराब है। फिर उसने मुझसे कहा कि ठीक है और फिर वो अकेली ही कॉलेज चली गयी।

अब में अपने घर वालों के जाने का इंतज़ार कर रहा था और करीब 9 बजे मेरे घर वाले भी शादी में चले गये और उन्होंने मुझसे कहा कि तुम दिन का खाना किंजल भाभी के यहाँ पर खा लेना, अगर तुम्हारी तबियत अच्छी रहे तो मैंने कहा कि ठीक है और अब में और भाभी अकेले थे।

करीब 11 बजे में सो रहा था तो भाभी मेरा हालचाल पूछने मेरे पास आई और में बस उनके बारे में ही सोच रहा था, वो साड़ी में बहुत मस्त लग रही थी। फिर उसने मुझसे पूछा कि अब तुम्हारी तबियत कैसी है? मैंने कहा कि ठीक है और उसने मुझसे कहा कि तुम खाना खाने आ जाना।

फिर 12:30 पर में उनके घर पर गया और में एक नींद की गोली लेकर गया, क्योंकि मुझे पता था कि वो इतनी आसानी से नहीं मानने वाली थी और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और मुझे कैसे भी करके उसके साथ सेक्स करना था। में उनके घर पर गया तो इस बार उसने कपड़े बदले हुए थे, उसने बहुत मस्त ड्रेस पहनी हुई थी और जो पीछे से तो बिल्कुल खुली हुई थी, मेरा तो उसे देखते ही लंड खड़ा हो गया।

फिर में अंदर चला गया और फिर उसने मुझसे कहा कि तुम टी.वी. देखो और तब तक में तुम्हारे लिए खाना लगा देती हूँ, लेकिन दोस्तों मेरा ध्यान टी.वी. में था ही नहीं, मेरा ध्यान तो बस उसके बदन पर था, वो जब भी चलती तो उसकी गांड मटकती और वो देखकर तो मेरा बहुत बुरा हाल हो रहा था। फिर हम खाना खाने बैठ गए और अब मुझे वो नींद की गोली उसके पानी के गिलास में डालनी थी, इसलिए मैंने उनसे ऐसे ही कहा कि भाभी मुझे थोड़ा नमक दीजिए ना।

फिर वो उठी और किचन में चली गयी और वो जब तक वापस आई, तब तक मैंने उसके गिलास में वो गोली डाल दी, लेकिन उसे इस बात का पता नहीं था और फिर हम ऐसे ही बात करने लगे। फिर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी क्या आपका कॉलेज में कोई बॉयफ्रेंड नहीं था? तो उसने मुझसे कहा कि नहीं कोई नहीं था।



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